मुंडेर सदा ही चमकती है या चमकायी जाती है चेहरे की तरह और नींव जिसके लिये आपको किसी की तलाश है वह पैरों की तरह होती है जिस पर सभी सुन्दर चेहरें टिके रहते तो है पर कोई भी पैर बनना या उसका दर्द समझना नही चाहता.
अरे राय साहेब कुछ आगे भी तो लिखिए. नही तो मेरे ब्लोग्स पर कुछ कमेंट्स ही डाल दीजिये. विजय कुमार जी ने बड़ा अच्छा देश भक्ति गीत लिखा है . उन्हें भी आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है. विनोद श्रीवास्तव
हाँ ! है ना, राणा ब्रांड के ईंट बहुतायत में मिलते हैं.
ReplyDeleteमेरे पास डिस्मेंटल में अच्छी और सस्ती ईंटे तुंरत उपलब्ध हैं
ReplyDeleteसंतोष जी,
ReplyDeleteमुंडेर सदा ही चमकती है या चमकायी जाती है चेहरे की तरह और नींव जिसके लिये आपको किसी की तलाश है वह पैरों की तरह होती है जिस पर सभी सुन्दर चेहरें टिके रहते तो है पर कोई भी पैर बनना या उसका दर्द समझना नही चाहता.
यह विचार है या अंतर्मन की व्यथा? अच्छी है.
मुकेश कुमार तिवारी
अरे राय साहेब कुछ आगे भी तो लिखिए.
ReplyDeleteनही तो मेरे ब्लोग्स पर कुछ कमेंट्स ही डाल दीजिये.
विजय कुमार जी ने बड़ा अच्छा देश भक्ति गीत लिखा है . उन्हें भी आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है.
विनोद श्रीवास्तव